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Archive for October, 2005

बरसों के बाद कहीं

Posted by ssjha on October 27, 2005

बरसों के बाद कभी
हमतुम यदि मिलें कहीं
,
देखें कुछ परिचित से
,
लेकिन पहिचानें ना।याद भी न आये नाम

,
रूप
, रंग, काम, धाम,
सोचें
,
यह सम्मभव है -
पर
, मन में मानें ना। हो न याद, एक बार
आया तूफान
, ज्वार
बंद
, मिटे पृष्ठों को -
पढ़ने की ठाने ना।
बातें जो साथ हुई,
बातों के साथ गयीं
,
आँखें जो मिली रहीं -
उनको भी जानें ना।
-  

Posted in Girja kumar mathur, Hindi, गिरिजाकुमार माथुर, हिन्‍दी | No Comments »